आज का चौघड़िया
अपने चयनित नगर एवं तिथि के अनुसार दिन एवं रात का चौघड़िया समय।
Delhi, India
Asia/Kolkata
तिथि / दिनांक · 2026-10-08
दिन का चौघड़िया
सूर्योदय से सूर्यास्त
- 06:17 – 07:45शुभआम तौर पर शुभ
- 07:45 – 09:13रोगआम तौर पर कम शुभ
- 09:13 – 10:40उद्वेगआम तौर पर कम शुभ
- 10:40 – 12:08चरमध्यम / सामान्य
- 12:08 – 13:36लाभआम तौर पर शुभ
- 13:36 – 15:03अमृतआम तौर पर शुभ
राहुकाल से मेल
- 15:03 – 16:31कालआम तौर पर कम शुभ
- 16:31 – 17:59शुभआम तौर पर शुभ
रात का चौघड़िया
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय
- 17:59 – 19:31अमृतआम तौर पर शुभ
- 19:31 – 21:03चरमध्यम / सामान्य
- 21:03 – 22:36रोगआम तौर पर कम शुभ
- 22:36 – 00:08 (+1 दिन)कालआम तौर पर कम शुभ
- 00:08 (+1 दिन) – 01:41 (+1 दिन)लाभआम तौर पर शुभ
- 01:41 (+1 दिन) – 03:13 (+1 दिन)उद्वेगआम तौर पर कम शुभ
- 03:13 (+1 दिन) – 04:45 (+1 दिन)शुभआम तौर पर शुभ
- 04:45 (+1 दिन) – 06:18 (+1 दिन)अमृतआम तौर पर शुभ
चौघड़िया क्या है?
दिन का चौघड़िया क्या है?
दिन का चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक के प्रकाश काल को आठ समान भागों में बाँटता है, और प्रत्येक भाग को पारंपरिक श्रेणी दी जाती है।
रात का चौघड़िया क्या है?
रात का चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की वास्तविक रात की अवधि को आठ समान भागों में बाँटता है।
कौन-से चौघड़िया आम तौर पर शुभ माने जाते हैं?
अमृत, शुभ, लाभ और चर को सामान्यतः शुभ माना जाता है; उद्वेग, काल और रोग को सामान्यतः कम शुभ माना जाता है।
समय शहर और तिथि के अनुसार क्यों बदलता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त, दिन की लंबाई और रात की लंबाई अक्षांश, देशांतर और स्थानीय समयक्षेत्र के अनुसार बदलते हैं, जिसमें DST भी शामिल है।
चौघड़िया और शुभ मुहूर्त में अंतर
चौघड़िया दिन-रात के सामान्य पारंपरिक समय क्षेत्रों का संकेत देता है। यह स्वचालित रूप से विवाह या गृह प्रवेश जैसे किसी विशिष्ट संस्कार के लिए योग्य शुभ मुहूर्त नहीं बनाता।
चौघड़िया समय का उपयोग
शहर के अनुसार चौघड़िया समय क्यों बदलता है?
दिन का चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त और रात का चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक आठ भाग करता है। स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से इनकी सीमाएँ तय होती हैं।
परंपरा में कौन-से चौघड़िया शुभ माने जाते हैं?
अमृत, शुभ और लाभ परंपरा में अनुकूल माने जाते हैं; चर को यात्रा और गति से जोड़ा जाता है। दिखाए गए राहुकाल के मेल और कार्य की आवश्यकता भी देखें।